Posts

मंदाक्रांता सेन की कविताएँ

Image
रास्ता तुम्हारी आँखों के भीतर एक लंबा रास्ता ठिठका हुआ है इतने दिनों तक मैं उसे नहीं देख सकी आज जैसे ही तुमने नज़रें घुमाई मुझे दिखाई दे गया वह रास्ता। बीच-बीच में तकलीफ़ झेलते मोड़ रास्ते के दोनों ओर थे मैदान फ़सलों से भरे खेत वे भी जाने कब से ठिठके हुए थे यह सब तुम्हें ठीक से याद नहीं आँखों के भीतर एक रास्ता पड़ा हुआ था सुनसान और जनहीन। दूसरी ओर कई योजन तक फैला हुआ है कीचड़ वहाँ रास्ता भी व्यर्थ की आकांक्षा-जैसा मालूम होता है कँटीली झाड़ियाँ और नमक से भरी है रेत, कहीं पर भी ज़रा-सी भी छाया नहीं इन सबको पार कर जो आया है क्या तुम उसे पहचानते हो? वह अगर कभी भी राह न ढूँढ़ पाए तो क्या तुम उससे नहीं कहोगे कि तुम्हारी आँखों में एक रास्ता है जो उसका इंतज़ार कर रहा है? -------------------------------------------------- लज्जावस्त्र रास्ते से जा रही हूँ और मेरे वस्त्र खुलकर गिरते जा रहे हैं मैं नग्न हुई जा रही हूँ माँ! और आखि़र घुटनों के बल बैठ जाती हूँ दोनों हाथों से जकड़ लेती हूँ दोनों घुटनों को, छुपा लेती हूँ अपना चेहरा अपना पेट अपना सीना खुली पीठ पर अनगिन...

नरेश शांडिल्य की कविताएँ

Image
पेड़ : कुछ दोहे पेड़ चिड़ी का घौंसला, साँसों का मधुगीत। हारे-हारे पाँव का, हरियाला संगीत।। छाया मन ऐसी बसी, ज्यों कोयल मन आम। मरुथल मन उद्यान ज्यों, दशरथ के मन राम।। पीपल फैला दूर तक, इक पनघट के पास। थका हुआ सूरज रुका, लगा बुझाने प्यास।। कटे हुए हर पेड़ से, चीख़ा एक कबीर। मूरख कल को आज की, आरी से मत चीर।। इक दिन जब मर जाएँगे, पेड़ लगा कर फाँस। लिए कटोरा घूमना, माँगा करना साँस।।   ----------------- आलोचक            उसने मेरे पसीने को पानी कहा मैं चुप रहा उसने मेरे आँसू को पानी कहा मैं चुप रहा उसने मेरे ख़ून को पानी कहा मैं चुप रहा लेकिन जब उसने अपनी लार को भी लावा कहा तो मैं चुप नहीं रहा अपनी कसी हुई मुट्ठियों और भिंचे हुए दाँतों के साथ मैं मुड़ा मुस्कुराया और चल दिया आगे अब मेरी कविता को उस आलोचक की कोई दरकार नहीं है ...     ----------------- ग़ज़ल ग़ज़ल है तू , तो गाना चाहता हूँ सरापा तुझको पाना चाहता हूँ तेरे पहलू में काटूँ उम्र सारी कोई ऐसा बहाना चाहता हूँ मेरे ...

रिकार्डो डॉमनिक की कविताएँ

Image
        कवि ने अपने प्रेमी का पच्चीसवाँ जन्मदिन मनाया   (यानिस ब्रेसनर के लिए) तुम्हारे जीवन से भी लम्बी लड़ाईयाँ हो चुकी हैं मैं तुम्हें बधाई देता हूँ आज सफलता से एक जिराफ़ या चमगादड़ बूढ़ी गाय, अजगर, या उल्लू से ज्यादा लम्बा जीवन जीने की। दुनियाभर में पेंगुइन और सुअर मर रहे हैं जिस पल तुम गर्भस्थ हुए उसी समय वे भी हुए । जब तुम एक निषेचित डिंब भर ही थे एक परिक्रमा भी पूरी नहीं की है तब से शनि ग्रह ने अब तक सूरज की पर मुझे गाइड करता है स्टॉकर ज़ोन को जाते हज़ारों रास्तों, रेंग कर पास आने लगा है एक और जाड़े का मौसम, मैं छुपाना चाहता हूँ तुम्हारे चिकने सीने में अपना चेहरा। अगर मैं कर पाता तो हमारे भविष्य के रात और दिनों की पटकथा लिखने के लिए लेम या स्त्रूगास्की भाईयों से मैं एक करार करता; साउंडट्रैक के लिए मैं दियामांदा गालास से करार करता जो गाती अपनी धौंकती और मिमियाती, कर्कश और घुरघुराती आवाज़ में और हम पापाचार में लिप्त रहते हैं। मैं जश्न मनाता हूँ तुम्हारे बालों के नीचे दिमाग का, तुम्हारे शरीर से जुड़े तने लिंग का, तुम्हारा ही समकालीन एक सुअर अब पहुँच गय...

स्तांका हर्स्तलेज़ की कविताएँ

Image
स्लोवेनियन कविता मां  मैं उसे प्यार करती हूँ इसके कुछ कारण हैं पर हालात बहुत बेढब हैं वह पंसारी की दुकान चली जाती है और तुम्हें  पता ही नहीं रहता और तुम खोजते रहते हो और उसे खोजते ही रहते हो घर में, इसी तरह हम खोजते थे पिताजी को भी     जिन कमरों में ट्यूबें लगीं होती थीं उनमें हम ख़ासकर खोजते थे उसके भाई ने रेडिएटर से लटक कर उसके जीजा ने पानी के पाइप से लटक कर ख़ुदकशी की थी महीनों तक हम उसे खोजते रहे लेकिन वह कहीं नहीं मिला तुम माँ को खोजते रहते हो,लेकिन किसी लाश को नहीं खोजते पर एक ज़िंदा दिल को खोजते हो जिसके झुर्राये कोमल हाथ अभी भी हमें कभी कबार सहलाते हैं लेकिन तुम उसे ढूँढ नहीं पाते हो बस एक विशाल ठंडा घर जिसके मुँह बाये खाली कमरे निगल जाना चाहते हैं तुम्हें तुम व्याकुल पड़े रहते हो जब तक वह लौट ना आए ------------------------------ गर्व मुझे पसंद है जिस तरह डॉक्टरों के झुंड के बीच मेरे पिता कूच कर जाते हैं एक मुखिया नर गोरिल्ला की तरह जिनके चोगों से भी ज्यादा सफ़ेद हैं उसके बाल डॉक्टर मेरे पापा की बहुत इज्जत क...

अज़िता क़हरेमान की कविताएँ

Image
मैंने जिया वे तमाम आदमी और औरतें जिनका जीवन मैंने जिया उनकी नींदें जिनमें मैंने देखे सपने उनके सपने जिन्हें मैंने जिया उनका दुख जो बचा रह गया मेरे रोने के लिए, वे तराने, हवाएँ और बुदबुदाते जाप अब फुसफुसाते हैं मेरे बीतते समय में.... वे औरतें जिनका जीवन मैंने जिया वीरान जगहों में वे निशान जिन्हें हवा उड़ा ले गई तुम्हारी आँखें और अनगिनत चेहरे तुम्हारी सूरत और मेरी आँखें वे कलेवर जिन्हें  मैंने जिया चीड़ के पेड़,पत्थर और कबूतर कबूतर, पत्थर और चीड़ के पेड़ मैं ही थी गिरती हुई सारी बरफ़ उमड़े समुंदर थे जो तुम्हारे भीतर, किसी और के रास्ते थे मेरे पैर किसी और के पैर और तुम्हारे रास्ते वे सारे गीत जो मैंने गाये तुम्हारे मुँह से सारे आदमियों और औरतों के चेहरे पर जिनका जीवन मैंने जिया ------------ समुंदर कोई आ सकता है क्या इस तट पर एक निशान लगाने और कहने कि यहाँ दुनिया का अंत है? मैं सोना चाहती हूँ समुंदर के शब्दों पर नुक़्तों और रेत पर कोई आ सकता है क्या और जो हटा सके उन्हें जो नमक का खंभा बन गए थे पलट देख एक झलक अनुपस्थित प्रदेश की, और क्या कोई कम कर सकता है इन दूरियों को? अपनी नग्नता के स...

राइनेर मरिया रिल्के की कविता

Image
  प्रेम गीत संभालूँ कैसे अपने दिल को कि वह छू ना पाए तुम्हारे दिल को तुम्हें विदा कर कैसे लगाऊँ दिल किसी और चीज़ पर? ओह मैं टिका ही दूँ इसे अँधेरे में खोई किसी चीज़ पर कि डोलना बंद कर दे तुम्हारी संवेदना की भावशून्यता में किसी अनजानी जगह का वीराना। पर वो सब जो हमें गूँथता तुझे और मुझे जोड़ता प्रत्यंचा की तरह हमारे दो किनारों को दो तारों से सुनाता वह एक ही स्वर है , हो जाते हैं किस वाद्य पर हम व्यग्र? हम वशीभूत हैं किस वायलिन वादक के हाथ में ? ओ᾿सुरीले  गीत! जर्मन से हिन्दी अनुवाद - डॉ रामप्रसाद भट्ट राइनेर मरिया रिल्के (1875-1926) जर्मन भाषा के विख्यात कवि, उपन्यासकार और पत्र लेखक।  रिल्के का विश्वास मुनष्य के भीतर की दुनिया में था। उनकी कविता उस 'भीतर की दुनिया' का बाहरीकरण है।  टिहरी गढ़वाल के एक सुदूर गाँव में जन्मे डॉ रामप्रसाद भट्ट  जर्मनी में हिंदी भाषा एवं साहित्य, आधुनिक भारतीय संस्कृति  एवं इतिहास का अध्यापन कर रहे हैं।  डॉ भट्ट हैम्बर्ग, जर्मनी में रहते हैं।  

प्रत्यक्षा की कविताएँ

Image
माइग्रेन- 1 उसने मेरे माथे में एक सुरंग बिछा दी है   बंकरों के पीछे जवान मुस्तैद हैं हथगोले लिये बारूद की गंध , उड़ते परखचे , खून , मांस मज्जा   चीख , रोना बिलखना मर जाना   खेत हुये सब , पटा है युद्ध क्षेत्र , मरघट का सन्नाटा विश्व का सबसे खूँखार युद्ध मेरे माथे के भीतर लड़ा जा रहा है   माइग्रेन- 2 मेरी शिराओं में किसी ने बर्फ डाल दिया है एक जमी हुई शिला   आँख के भीतर   पुतलियों के रास्ते एक सुरंग   लाल , गर्म , चमकीला   बाहर अब भी कितनी धूप है   और जीवन कैसे   सँभावनाओं से भरा माइग्रेन- 3 कितना गर्म है सब दहकता लाल   एक कठफोड़वा है   कोई चीता भी   घात लगाये   चौकन्ना   एक पेड़ है   सख्त , खुरदुरा   उसके पत्ते सुर्ख लाल गिरते हैं एक एक एक जबतक पूरी धरती हो नहीं जाती   आरक्त   माइग्रेन- 4 जैसे साँप का फन ...